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मेरे लिए राजेश खन्‍ना ही सुपरस्‍टार हैं


अभिनेता अक्षय कुमार

 


दि राइजिंग न्‍यूज

कॉमेडी, एक्‍शन, रोमांस और भी बहुत कुछ। बहुआयामी व्‍यक्तित्‍व के धनी अभिनेता अक्षय कुमार लगभग ढाई दशक से बॉलीवुड में राज कर रहे हैं। उनकी फैन फॉलोइंग भी जबरदस्‍त है। रुस्‍तम में दमदार रोल करने के बाद अब वह जुट गए हैं जॉली एलएलबी-2 की तैयारियों में। शूटिंग के सिलसिले में वह लखनऊ आए हुए हैं।


 

लखनऊ में मजा आ गया

अक्षय को लखनऊ भा गया। बताते हैं कि इससे पहले भी कई बार लखनऊ आ चुके हैं। खाना तो लाजवाब है ही, यहां की मेहमाननवाजी ने भी दिल जीत लिया।



पर बार-बार कॉमिडी फिल्म...? 

करीब चार साल हो गए हैं मुझे कॉमिडी करते हुए। पिछली फिल्में स्पेशल 26, हॉलिडे, बेबी, गब्बर इज़ बैक के ब्रदर्स में मैंने हर बार डिफरंट किरदार किया। सिंग इज ब्लिंग को भी इसी श्रेणी में रखिए, हालांकि इसे मैं टोटल कॉमिडी फिल्म नहीं कहूंगा। यह एक एंटरटेनर फिल्म थी। अब जॉली एलएलबी की बारी है। मैं अपना बेस्‍ट दूंगा। हालांकि इस बात में कोई शक नहीं है कि मुझे रियल सिनेमा पसंद है, लेकिन कॉमिडी को छोड़ना मुझसे हो नहीं पाता। मुझे डार्क कॉमिडी काफी पसंद है और दिलचस्प बात यह कि मेरी हर किस्म की फिल्म के दर्शक मुझे मिल जाते हैं। 



मुनाफे की हो फिल्‍म


दर्शकों का प्यार तो है ही। इसके अलावा मैं अपनी फिल्में एक तय बजट में बनाता हूं, ताकि कमाई ज्यादा हो या कम, बात मुनाफे की ही हो। मैं ऐसे डायरेक्टर्स के साथ काम करना पसंद करता हूं, जो 35-40 करोड़ में फिल्म निपटा दें। चूंकि, मैं फिल्में सिर्फ पैसा कमाने के लिए करता हूं तो फिल्म की कमर्शल बैकिंग पर मेरी हमेशा नजर रहती है। ऐसा न होता, तो मैं डॉक्युमेंट्री फिल्में ही न बनाने लगता। इन सबके बावजूद मैं चाहता हूं कि मेरी फिल्मों में हल्का फन हो और एक अच्छा मेसेज भी। 



नियम के पक्‍के हैं अक्षय

काम के मामले में मैं अपने बताए नियमों पर चलता हूं। मेरा एक रूल यह भी है कि एक वक्त में एक फिल्म करनी है। एक फिल्‍म खत्‍म करने के बाद तुरंत दूसरी पकड़ लेता हूं। 


ओह माई गॉड के विवाद के बाद-

पता नहीं विवाद क्‍यों उठे। जब यह फिल्म रिलीज हुई, तो उस वक्त मुझे हर दिन ऐसे मेसेज और मेल आते थे कि हमने फिल्म देखने के बाद मंदिर में दूध चढ़ाना बंद कर दिया है। कुछ यंग फैन्स ने मंदिर या गुरुजी के आश्रम में दान देने के बजाए गरीबों की मदद करना शुरू कर दिया। तो मुझे लगा कि फिल्म सफल रही। मैं मानता हूं कि आप किसी संस्था को दान में रकम देते हैं, तो आपको नहीं मालूम कि आपका दिया दान किसके पास और कहां जाता है, तो फिर उसी अमाउंट को आप अपने हाथों से जरूरतमंदों को क्यों नहीं देते। मैंने बचपन से अपने माता-पिता से मंदिर का अर्थ मन के अंदर ही समझा है। ऐसा कौन सा शख्स होगा, जो अपने सीने पर हाथ रखकर कहेगा कि मेरे अंदर भगवान नहीं है। मैं भी बरसों से हर साल एक धार्मिक यात्रा पर जाता था। कई बार तो साल में दो बार भी चला जाता था। कुछ अरसे बाद मुझे लगा कि अपने इस सालाना धार्मिक टूर पर मैं जो चार लाख रुपए खर्च करता हूं, क्यों न इस रकम को मैं अपने स्टाफ में बांट दूं इसलिए मैं कहूंगा कि मेरा नजरिया और तरीके बदल गए हैं। 



शराबी का रोल अजीब लगता है

मैंने कभी चाय, कॉफी, सिगरेट नहीं पी। ऐसे में जब किसी फिल्म में शराबी का रोल करना पड़ता है, तो अजीब महसूस करता हूं। अब जब इस इंडस्ट्री में हूं, तो सब कुछ करना भी पड़ता है, लेकिन ऐसा किरदार निभाना मुझे यकीनन पसंद नहीं। 




वाइफ चुटकी ले लेती हैं





फैन्स ने मुझे स्टार बना दिया है, लेकिन मैरिज के बाद से मेरे घर में राजेश खन्ना जी सुपर स्टार थे और वही रहेंगे। ट्विंकल अक्सर कह देती है कि मुझमें उसके पापा जैसा कोई गुण नहीं है। मैं इस बात का जरा भी बुरा नहीं मानता, क्योंकि मैं जानता हूं कि हर बेटी के लिए उसका पिता ही एक रियल हीरो होता है। बेटियों को हमेशा लगता है कि उनके पापा की खूबियां उनके पति में नहीं हो सकतीं। 



फिल्‍म का प्रमोशन कितना फायदे वाला 

मेरा मानना है कि फिल्म प्रमोशन के लिए दस दिन बहुत होते हैं। इस दौरान फैन्स से मिलने का मौका मिलता है। कई बार प्रमोशन के दौरान ऐसे सवालों के भी जवाब देने पड़ते हैं कि दिल करता है कि सवाल करने वाले के बाल नोच लूं, क्योंकि वह ऐसा सवाल कर रहा है, जिसका मुझसे दूर-दूर तक कोई वास्ता ही नहीं है। खैर, फिल्मों के लिए प्रमोशन करना पड़ता है। मुझे 12 दिन से ज्यादा प्रमोशन करना बेकार लगता है। 

 

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