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Campus Corner Lucknow | 17-Oct-2016 01:55:09 PM
एकेटीयू: घोटाले की सीबीआइ जांच कराने की मांग


  • आगरा के अंजलि कॉलेज का आरोप- कुलपति और सब रजिस्ट्रार मामले में मास्टरमाइंड


 

दि राइजिंग न्यूज

17 अक्टूबर, लखनऊ।

लगातार विवादों में घिरी डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विवि में घोटाले और भ्रष्टाचार की जांच की राह अब दिल्ली तक पहुंच गई है। आगरा के एक फॉर्मेसी कॉलेज ने घोटालेबाजों के रैकेट का आरोप लगाते हुए सीबीआइ (सेन्ट्रल इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो) से जांच कराने की मांग की है। इस संबंध में बकायदा तीन पन्ने का शिकायती पत्र सीबीआइ को भेजा गया है। मामले में भरोसा जताया गया है कि सीबीआइ जांच अब होकर रहेगी। इससे घोटालेबाजों के रैकेट का पर्दाफाश होगा। मांग की गई है कि मामले में भंडाफोड़ करके सीबीआइ ही सात सौ से ज्यादा कॉलेजों पर अवैध वसूली को रोक सकती है। इससे छात्रों का भला होगा। इसके साथ ही एशिया की सबसे बड़े प्राविधिक विवि में से एक एकेटीयू में घोटालेबाजों के रैकेट को भी बेनकाब किया जा सकेगा।


इस तरह का लगा है आरोप

मामला आगरा के अंजलि कॉलेज ऑफ फॉर्मेसी का है जिसके पास फॉर्मेसी कोर्स के दाखिले के लिए एआइसीटीइ ने बी-फार्मा में 60 सीटों पर दाखिले की अनुमति दी। लम्बे समय से यह कॉलेज बहुत अच्छी गति से चल रहा था लेकिन विवि ने साल भर से अवैध रूप में वसूली करने का प्लान शुरू किया। यह आरोप कॉलेज का है। यह भी आरोप है कि पहले से हम लोगों की सिक्योरिटी फंड लाखों में जमा है और विवि ने फिर से 10 लाख रुपये की मांग की। कहा ‍कि पैसे दे दीजिए। पैसा ‍दिया नहीं तो विवि सीटें घटा देगा। जब मान्यता के बाद सीटें घटीं तो कॉलेज ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद विवि ने छात्रों के पंजीकरण ईआरपी लॉगिंग ही बंद कर दी।


कुलपति और डिप्टी ‍रजिस्ट्रार हैं मामले में मास्टरमाइंड : गुप्ता

अंजलि कॉलेज के चैयरमैन देवेन्द्र गुप्ता ने बताया कि एकेटीयू में कुलपति व रजिस्ट्रार मिलकर घोटाला कर रहे हैं। पहले कुलपति व रजिस्ट्रार दोनों कानपुर में थे। लेकिन जब कुलपति एकेटीयू गए तो उनको भी लेते गए क्योंकि वे बारीकियां समझते थे। इसके बाद दोनों मिलकर करीब एक हजार कॉलेजों को डील कर रहे हैं। इसके बीच में कोई नहीं है। जो भी ‍डीलिंग होती है सब रजिस्ट्रार ही करते हैं। वह घोटाले का मुख्य मास्‍टरमाइंड है। इस कारण हमने सीबीआइ से मांग की है ‍कि घोटाले की जांच वह ही कर सकती है क्योंकि वे बहुत प्रभावशाली लोग हैं। इससे लाखों छात्रों का भविष्य तबाह होने से बच जाएगा। एकेटीयू के डिग्री धारकों को नौकरी नहीं मिल रही है। लोग पांच हजार में नौकरी करने को विवश है। इस कारण जांच करके दोषियों को सजा मिले जिससे छात्रों का नुकसान न हो।


जांच होनी चाहिए : डिप्टी रजिस्ट्रार-एकेटीयू

इस मामले में जब डिप्टी रजिस्ट्रार एके शुक्ला से बात की गई तो उन्होंने बताया ‍कि जहां तक सीबीआइ जांच की मांग है तो होनी चाहिए। हम भी यही चाहते हैं कि जांच हो। ताकि दूध का दूध व पानी का पानी साफ हो सके। रही बात विवि की तो हम नियम व कानून के साथ चलते हैं और उसी प्रकार काम करते हैं।


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