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Campus Corner Kanpur | 1-Dec-2016 02:58:55 PM
लड़ाई बीमारी से लड़नी है, बीमार से नहीं

  • विश्‍व एड्स दिवस पर सीएसजेएमयू में आयोजित कार्यक्रम में रखे विचार
  • विशेषज्ञों ने कैंप में मरीजों की जांच की, कार्यशाला का आयोजन



 

दि राइजिंग न्‍यूज

01 दिसंबर, कानपुर।

नफरत अपराध से करनी चाहिए अपराधी से नहीं। लड़ाई बीमारी से करनी चाहिए बीमार से नहीं। यह संदेश छत्रपति शाहूजी महाराज विश्‍वविद्यालय के प्रागंण में आज गूंजा। अवसर था एड्स दिवस पर आयोजित कार्यक्रम का।

सीएसजेएमयू के सभागार में गुरुवार को विश्‍व एड्स दिवस पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। सुबह दस बजे से स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र में रक्‍तदान शिविर और स्‍वास्‍थ्‍य परीक्षण कैंप लगाया गया। आयोजन विश्‍वविद्यालय के इंस्‍टीट्यूट ऑफ हेल्‍थ साइंस की ओर से किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन बतौर अध्‍यक्ष विश्‍वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे वी वैशम्‍पायन और आइजी कानपुर जकी अहमद और बतौर विशिष्‍ट अतिथि आए मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारी डॉ आरपी यादव ने दीप प्रज्‍ज्‍वलित कर किया।

इस अवसर पर वक्‍ताओं ने एड्स की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह बीमारी सावधानी के जरिये ही हराई जा सकती है। एड्स का इलाज जितना मेडिकल साइंस की जिम्‍मेदारी है उससे कहीं ज्‍यादा सामाजिक और व्‍यक्तिगत जिम्‍मेदारी की बानगी है।

कैंप के साथ ही इंस्‍टीट्यूट ऑफ हेल्‍थ साइंस के सभागार में वर्कशॉप का आयोजन भी किया गया। जिसमें बतौर मुख्‍य वक्‍ता पधारीं जीएसवीएम के स्‍त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्‍यक्षा प्रो. किरण पाण्‍डेय ने शिरकत की। उन्‍होंने एड्स बीमारी को लेकर फैली सामाजिक भ्रांतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि किसी बीमारी को हौव्‍वा बना देने से समाज के बड़े तबके के मन पर भ्रांतियां हावी हो जाती हैं। साथ उठने-बैठने खाने-पीने से एड्स नहीं फैलता इसके बावजूद लोग एड्स रोगियों के साथ अछूत जैसा व्‍यवहार करने लगते हैं। वहीं एड्स फैलने की मुख्‍य वजहों असुरक्षित यौन संबंध, रेजर या सीरिंज के इस्‍तेमाल को हल्‍के में ले लेते हैं, जो कि इस बीमारी के फैलने की मुख्‍य वजह है।

वर्कशॉप में आइएमए के अध्‍यक्ष डॉ प्रवीण कटियार ने कहा कि जब कोई बीमारी लाइलाज रूप धारण करने लगती है तो मेडिकल साइंस की जिम्‍मेदारियां और बढ़ जाती हैं। इसके साथ ही सामाजिक भागीदारी को भी आगे बढ़ने की जरूरत होती है। उन्‍होंने कहा कि हमारे देश के एक बड़े तबके में एड्स आज भी छुआछूत से फैलने वाली बीमारी के रूप में जाना जाता है, जो कि पूरी तरह गलत है। जिस तरह अपराध से नफरत करनी चाहिए, अपराधी से नहीं वैसे ही एड्स के बीमार से नफरत या अछूतपन की जगह एड्स फैलने वाले कारणों से बचाव किया जाना ज्‍यादा जरूरी है।

इस अवसर पर डॉ वीसी रस्‍तोगी, डॉ आर सी अवस्‍थी, डॉ राहुल मिश्रा, डॉ अलका मिश्रा, डॉ भारती आदि मौजूद रहीं।

शिविर कैंप में मौजूद रहे विशेषज्ञ

इंस्‍टीट्यूट ऑफ हेल्‍थ साइंस की ओर से आयोजित शिविर में शहर के नामी-गिरामी चिकित्‍सक मौजूद रहे। डॉ अजय कटियार, डॉ एस के निगम, डॉ एम पी वर्मा ने जनरल बीमारियों की जांच की तो त्‍वचा विशेषज्ञ डॉ सुशील चंद्रा, डॉ डीपी शिवहरे ने भी मरीजों की पड़ताल की। वहीं नेत्र चिकित्‍सा के विशेषज्ञों में डॉ अवध दुबे, डॉ संजीव रोहतगी ने मरीजों को देखा और दवाएं लिखीं। ईएनटी में डॉ पंकज गुलाटी, डॉ प्रकाश खत्री, हार्ट एक्‍सपर्ट के तौर पर डॉ अवधेश शर्मा रहे। हड्डी से संबंधित बीमारियों की जांच डॉ आर के शुक्‍ला, डॉ ए एस प्रसाद और डॉ विनय गुप्‍ता ने की। गाइनो की बीमारियों को डॉ कि‍रन पाण्‍डेय और डॉ शर्मीली ओबेराय ने देखा। वहीं डॉ भारती दीक्षित ने डायट चार्ट और न्‍यूट्रीशियन को लेकर होने वाली बीमारियों का निवारण किया। चाइल्‍ड एक्‍सपर्ट के तौर पर डॉ वी के टंडन और डॉ श्रद्धा गर्ग रहीं। दंत चिकित्‍सा के एक्‍सपर्ट डॉ आशीष कटियार भी मौजूद रहे। सर्जरी की सलाह और जांच संबंधी परामर्श डॉ यूसी सिन्‍हा ने दिए।

डॉ प्रवीण कटियार ने बताया कि कैंप में बीपी, ब्‍लड शुगर की बीएमडी, बीएमआई की निशुल्‍क जांचों के साथ ही अन्‍य महंगी जांचों को इंस्‍टीट्यूट ऑफ हेल्‍थ साइंस के पैथालॉजी लैब में आधी दरों पर जांचें उपलब्‍ध कराई गईं। 


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