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Senior Citizen | 18-May-2016 02:22:20 PM
देश की ताकत हैं वरिष्ठ नागरिक


 

 


दि राइजिंग न्‍यूज

विश्व स्वास्थ्य संगठन हर साल एक अक्तूबर को अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दविस [इंटरनेशनल डे ऑफ ओल्डर पर्सन] मनाता है, जिसमें देश और समाज के विकास में वरिष्ठ नागरिकों की भूमिका के महत्व को रेखांकित किया जा सके। इस साल इसकी दसवीं वर्षगांठ है।


रामकृष्ण मिशन से जुडे़ स्वामी शतानंद ने कहा कि भारतीय संस्कृति और समाज में बुजुर्ग व्यक्ति का शुरुआत से ही काफी महत्वपूर्ण स्थान रहा है और किसी परिवार का मुखिया बुजुर्ग व्यक्ति ही होता है। उन्होंने कहा कि हालांकि भारतीय परिवार पश्चिमी प्रभाव में आ रहे हैं और पश्चिमीकरण के चलते लोगों के दिलोदिमाग में बुजुर्ग के बारे में नकारात्मक सोच विकसित हो रही है। लेकिन यह अगली पीढ़ी के लिए अहितकर है।


उन्होंने कहा कि पश्चिम में लोग घर के बुजुर्गों को ओल्डर होम में छोड़ देते हैं। यह प्रवत्ति हमारे देश में भी विकसित हो रही है। ऐसा करने वाले लोग बुजुर्गों के भावनात्मक सहयोग, ज्ञान और अनुभव भंडार से अछूते रह जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार इस वक्त दुनिया में करीब 60 करोड़ लोगों की उम्र 60 साल या उससे अधिक हैं, जो 2025 में दोगुनी हो जाएगी और 2050 तक दो अरब लोग बुजुर्ग होंगे। इनमें अधिकांश बुजुर्ग विश्व के विकासशील देशों में होंगे।


विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बदलती दुनिया में बुजुर्गों की बेहद महत्वपूर्ण भूमिका होगी। वे अपने अनुभव और ज्ञान की पूंजी को बांटकर परिवारों को अधिक जिम्मेदार बना सकते है। इस वक्त भी समाज में बुजुर्ग व्यक्ति अपना योगदान दे रहे हैं। जैसे अफ्रीका में लाखों युवा एड्स के मरीज हैं और घर के बुजुर्ग व्यक्ति उनकी देखभाल कर रहे हैं। इसके अलावा अफ्रीकी देशों में इस वक्त करीब 1.4 करोड़ बच्चों की देखभाल उनके दादा-दादी कर रहे हैं।


एक अध्ययन के मुताबिक, विकासशील देशों की प्रगति में वरिष्ठ नागरिकों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है। उदाहरण के तौर पर स्पेन में प्रति दिन देखभाल की अवधि इस बात की ओर इशारा करती है। 65 से 74 वर्ष आयु वर्ग के बुजुर्ग 201 मिनट और 75 से 84 आयु वर्ग के 318 मिनट खर्च करते हैं। वहीं, 30 से 49 साल के लोग केवल 50 मिनट खर्च करते हैं।

 

 

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