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Guest Column | 6-Jul-2016 08:52:39 PM
भाईचारे व मिलन का त्‍योहार है ईद-उल-फितर


 

 दि राइजिंग न्‍यूज


मौलाना मो. नियाज निजामी

ईद-उल-फितर या ईद  मुसलमानों के सबसे बड़े त्‍योहारों में से एक है। यह दुनिया भर के मुसलमानों का सबसे महत्वपूर्ण त्‍योहार है। यह त्‍योहार भारत सहित पूरी दुनिया में बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। ईद का पर्व रमजान के पवित्र महीने के बाद मनाया जाता है। 




मुसलमानों के लिए रमजान माह के दिनों का बहुत ही महत्त्व है। इस दौरान वे दिन भर रोजा रखते हैं। खाना पीना बंद करने के साथ साथ हमें किसी को भी तकलीफ नहीं देना व आंखों से गलत चीज नहीं देखना, कानों से गलत चीज नहीं सुनन, जबान से बुरी बात न कहना जिससे की  किसी को तकलीफ पहुंचे । शाम को सूरज डूबने के बाद ही रोजा खोलते है। रमजान के महीने के अंतिम दिन जब आसमान में चाँद दिखाई देता है तो उसके दूसरे दिन ईद मनाई जाती है। सबे बरात (रमजान के 26वें रोजे के दिन से ही) रात में मस्जिदों पर रोशनी की जाती है, जो ईद तक जगमगाती रहती है। 




ईद का त्यौहार मनाने की तैयारी पहले से ही शुरू कर दी जाती है। बच्चे, युवा, वृद्ध सभी उत्साहित दिखाई देते हैं। बाज़ारों में भीड़ बढ़ जाती है। अमीर-गरीब सभी नए वस्त्र, जूते-चप्पल, उपहार आदि खरीदने में व्यस्त हो जाते हैं। 




ईद के दिन सुबह से ही बच्चे, युवा, वृद्ध सभी नये वस्त्र पहनकर, सर पर टोपी लगाकर ईदगाह में जमा होने लगते हैं। वहाँ सभी एक ही कतार में खड़े होकर होकर ईदुल फितर की नमाज़ अदा करते हैं। देश की सभी प्रमुख मस्जिदों में भी ऐसा ही नजारा देखा जा सकता है। सभी आपसी भेद-भाव भूलकर गले मिलते हैं और एक-दूसरे को ईद की बधाई देते हैं। 



ईद के दिन मुसलमानों के घर मीठी सेवईं बनती है। इसके अलावा अनेक प्रकार के व्यंजन भी तैयार किये जाते हैं। लोग अपने सगे सम्बन्धियों के घर जाकर उन्हें ईद की मुबारकबाद देते हैं। ईद आपसी मिलन और भाई-चारे का त्यौहार है। यह त्यौहार भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इस पर्व को भारत के सभी समुदायों के लोग बहुत खुशी व मिलजुल कर मनाते है। ईद का त्यौहार सभी के लिए खुशियाँ लेकर आता है। यह त्यौहार दया, परोपकार, उदारता, भाई-चारा आदि मानवीय भावनाओं से युक्त होता है।



रमजान माह में इंसान पूरे महीने के रोजे रखता है व अल्लाह की इबादत करता है व कुरआन की तिलावत करता है। जकात, फितरा, सदका देता है। पूरा माह गुजरने के बाद जो उसने इबादत की उसके बदले उसे ईद के रूप में मालिक उसे खुशी अता करता है। रमजान के आखरी दिन चांद दिखने के बाद दूसरे दिन उसे र्ईद के रूप में उसके द्वारा महीने भर में की गई नेकी के बदले उसको उसका सिला ईनाम के रूप में ईद मिलती है। ईद का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण दिन होता है ईद के रोज इंसान जो दुआ मांगता है वह कबूल होती है। ईद के रोज गुनाहों से बचना चाहिए, क्योंकि इंसान रमजान महीने के पूरे रोजे रखता व हर बुरी चीज से बचता रहता है। ईद के रोज भी कम से कम बुराइयों से बचे।  




ईद के दिन की सुन्नते इस तरह हैं-

1. शरीअत के मुताबिक खुद को साफ-सुथरा करना, 2. गुस्ल करना, 3. मिस्वाक करना 4. अच्छे कपड़े पहनना, 5. खुश्बू लगाना, 6. सुबह जल्दी उठना, 7. सुबह जल्दी उठ कर फजर की नमाज जमात से पढऩा 8. बहुत सवेरे ईदगाह पहुंच जाना 8. ईदगाह जाने से पहले मीठी चीज खाना 9.  ईद की नमाज ईदगाह में अदा करना 10. एक रास्ते से जाकर दूसरे रास्ते से वापस आना 11. पैदल जाना, 12, रास्ते में धीरे-धीरे तकबीर पढऩा, 13.किसी को भी तकलीफ न पहुंचाना 14. ईद की मुबारकबाद देना 15. अपने अजीज व अकारीब के साथ जाना 16. ईदुल फितर की नमाज अदा करने से पहले सदका, फितरा (गरीबों को दान देना)



 

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