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Spiritual | 17-Nov-2016 01:42:45 PM
पीतांबरा पीठ में पूरी होती है हर कामना

  • दतिया जिले में स्थित मां पीतांबरा का मंदिर अद्भुत
  • भक्तों की होती है भारी भीड़ लगता है मेला


 

 


दि राइजिंग न्‍यूज

मध्य प्रदेश के दतिया जिले में स्थित मां पीतांबरा के मंदिर आने वाले भक्तों को मां कभी निराश नहीं करती। कहा जाता है कि मां पीतांबरा देवी दिन में तीन बार अपना रूप बदलती हैं। मां के दर्शन से सभी भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। उत्तर प्रदेश के झांसी शहर से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थिति मां भगवती के इस मंदिर तक दूर दराज के लोग झांसी आकर पहुंच सकते हैं। कहते हैं विधि विधान से अगर अनुष्ठठान कर लिया जाए तो मां जल्द ही मुराद पूरी कर देती हैं।


मां पीतांबरा को राजसत्ता की देवी माना जाता है और इसी रूप में भक्त उनकी आराधना करते हैं। राजसत्ता की कामना रखने वाले भक्त यहां आकर गुप्त पूजा अर्चना करते हैं। मां पीतांबरा शत्रु नाश की अधिष्ठात्री देवी भी मानी जाती हैं और राजसत्ता प्राप्ति में मां की पूजा का विशेष महत्व होता है।

 

मध्यप्रदेश के दतिया जिले में स्थित मां पीतांबरा को राजसत्ता की देवी माना जाता है। इसी रूप में भक्त उनकी आराधना करते हैं। राजसत्ता की कामना रखने वाले भक्त यहां आकर गुप्त पूजा अर्चना करते हैं। मां पीतांबरा शत्रु नाश की अधिष्ठात्री देवी हैं और राजसत्ता प्राप्ति में मां की पूजा का विशेष महत्व होता है।


इस सिद्धपीठ की स्थापना 1935 में स्वामीजी के द्वारा की गई। ये चमत्कारी धाम स्वामीजी के जप और तप के कारण ही एक सिद्ध पीठ के रूप में जाना जाता है। भक्तों को मां के दर्शन एक छोटी सी खिड़की से ही होते हैं। मंदिर प्रांगण में स्थित वनखंडेश्वर महादेव शिवलिंग को महाभारत काल का बताया जाता है। मंदिर प्रांगण में ही मां धूमावती का भी मंदिर है। यह मंदिर कुछ निश्चित समय पर ही खुलता है और धूमावती माता का सुहागिन औरतों को दर्शन करना वर्जित है।


 

हाल ही में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को ललित मोदी कनेक्शन मामले में राजनीतिक संकट चल रहा था तब वसुंधरा यहां मां से आशीर्वाद लेने आर्इं थीं। उन्होंने सकंट कट जाए इसलिए यहां यज्ञ भी करवाया था। इस मंदिर को चमत्कारी धाम भी माना जाता है। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी या अटल बिहारी वाजपेयी हों या फिर राजमाता विजयाराजे सिंधिया ही क्यों न हों, और बात करें फिल्म अभिनेता संजय दत्त की, प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, दिग्विजय सिंह, उमाभारती की, यह फेहरिस्त बहुत लंबी है। ऐेसा माना जाता है कि इस स्थान पर आने वाले की मुराद जरूर पूरी होती है, उन्हें राजसत्ता का सुख जरूर मिलता है।

 

 

भारत चीन युद्ध के समय हुआ था यज्ञ

बात उन दिनों की है जब भारत और चीन का युद्ध 1962 में प्रारंभ हुआ था। बाबा ने फौजी अधिकारियों एवं तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के अनुरोध पर देश की रक्षा के लिए मां बगलामुखी की प्रेरणा से 51 कुंडीय महायज्ञ कराया था। परिणामस्वरूप 11वें दिन अंतिम आहुति के साथ ही चीन ने अपनी सेनाएं वापस बुला ली थीं।


उस समय यज्ञ के लिए बनाई गई यज्ञशाला आज भी है। यहां लगी पट्टिका पर इस घटना का उल्लेख है। जब-जब देश के ऊपर विपत्तियां आती हैं तब-तब कोई न कोई गोपनीय रूप से मां बगलामुखी की साधना व यज्ञ-हवन अवश्य ही कराते हैं। मां पीतांबरा शक्ति की कृपा से देश पर आने वाली बहुत सी विपत्तियां टल गई हैं। इसी प्रकार सन 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में मां बगलामुखी ने देश की रक्षा की।


सन 2000 में कारगिल में भारत-पाकिस्तान के बीच पुन: युद्ध हुआ, किंतु हमारे देश के कुछ विशिष्ट साधकों ने मां बगलामुखी की गुप्त रूप से पुन: साधनाएं एवं यज्ञ किए जिससे दुश्मनों को मुंह की खानी पड़ी। ऐसा कहा जाता है कि यह यज्ञ तात्कालीन प्रधानमंत्री अटल बीहारी वाजपेयी के कहने पर यहां कराया गया था।


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