प्रतीकात्मक चित्र
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द राइजिंग न्यूज़ ,पलक्कड़
केरल के एक गांव की पंचायत ने ब्रिटिश शासन की पहचान को पीछे छोड़कर खिलाफ अनूठी पहल की है। उत्तर केरल के पलक्कड़ जिले में माथुर गांव पंचायत ने अपने कार्यालय परिसर में 'सर' और 'मैडम' जैसे औपनिवेशिक काल के आदरसूचक शब्दों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसका मकसद आम जनता, जन प्रतिनिधियों और नगर निकाय अधिकारियों के बीच खाई को भरना है। साथ ही एक-दूसरे के बीच प्यार और विश्वास बढ़ाना भी इसका उद्देश्य है। इसके साथ ही माथुर इस तरह की सलामी के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाला देश का पहला निकाय बन गया है।

पंचायत परिषद की हाल की एक बैठक में सर्वसम्मति से ऐतिहासिक फैसला लिया गया और नए नियम पर अमल शुरू किया गया। राजनीतिक मतभेदों को भूलकर 16 सदस्यीय कांग्रेस शासित ग्राम पंचायत में सीपीएम के सात सदस्यों और भाजपा के एक सदस्य ने इस हफ्ते की शुरुआत में इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया था।


माथुर पंचायत के उपाध्यक्ष पी आर प्रसाद ने कहा कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य पंचायत कार्यालय आने वाले आम लोगों और जन प्रतिनिधियों के साथ ही अधिकारियों के बीच खाई को भरना है। पंचायत सदस्यों का यह भी मानना था कि ये सम्मान सूचक शब्द औपनिवेशिक काल के अवशेष थे।

पीआर प्रसाद ने कहा, 'लोकतंत्र में लोग सबसे ऊपर हैं और जन प्रतिनिधि और अधिकारी उनकी सेवा करते हैं। उन्हें अपने लिए कुछ कराने के लिए हमसे कोई अनुरोध करने की आवश्यकता नहीं है लेकिन वे सेवा की मांग कर सकते हैं, क्योंकि यह उनका अधिकार है।'

पंचायत सदस्यों ने शासकीय भाषा विभाग से 'सर' और 'मैडम' शब्दों के विकल्प मुहैया कराने का भी अनुरोध किया। केरल की इस पंचायत ने पूरे देश को रास्ता दिखाते हुए नई लकीर खींची है। अब देखना होगा कि दक्षिण भारत के एक छोटे से गांव की यह पहल कहां तक अपना असर दिखाती है।

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