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| 7-Jul-2016 06:08:32 PM
कांग्रेस के लिए मूल्यवान साबित हो सकता है प्रियंकास्त्र

 


सुधांशु द्वेदी
सुधांशु द्वेदी
(भाजपा प्रवक्ता)

सुधांशु द्विवेदी

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा को 2017 में होने वाले उत्तरप्रदेश चुनावों के मद्देनजर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। यह भी माना जा रहा है कि प्रियंका गांधी को यूपी चुनाव में बड़ी जिम्मेदारी देने के साथ ही उन्हें यहां से चुनाव भी लड़ाया जा सकता है। वैसे यदि प्रियंका गांधी यूपी चुनाव में अहम जिम्मेदारी निभाने के लिये तैयार हो जाती हैं तो यह कांग्रेस पार्टी के लिये राजनीतिक रूप से काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे पहले प्रियंका गांधी अमेठी एवं रायबरेली में चुनाव प्रचार की कामन संभालती आई हैं तथा उनकी यह चुनावी सक्रियता पार्टी के लिये काफी मददगार साबित होती आई है।



इस दृष्टि से यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव अगर प्रियंका गांधी पूरे प्रदेश में पार्टी के चुनाव प्रचार का जिम्मा ही संभाल लेती हैं तो इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में एक अलग ही उत्साह एवं ऊर्जा का आलम नजर आएगा। क्यों कि खासकर उत्तरप्रदेश में कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में लाने की मांग जोर-शोर से उठाई जाती रही है। कई बार तो कांग्रेस कार्यकर्ता अपनी इस मांग की अभिव्यक्त पोस्टर-बैनरों के माध्यम से करते रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं की व्यापक भावनाओं का सम्मान करते हुए अगर कांग्रेस हाईकमान खासकर यूपी चुनाव में प्रियंका गांधी को बड़ी जिम्मेदारी सौंपने का मन बना रहा है तो इससे प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों को बदलने में काफी मदद मिल सकती है। 




क्यों कि यूपी में कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की कमी नहीं है। आवश्यकता है तो बस उन्हें संगठित और ऊर्जित रखने की और यह काम प्रियंका गांधी बखूबी कर सकती हैं क्यों कि राजनीतिक जानकार भी ऐसा मानते हैं कि उनमें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की छवि की वह झलक दिखती है जिसे दृढ़ निश्चय एवं लक्ष्य प्राप्ति का पर्याय माना जाता है। इस दृष्टि से यूपी चुनावों के मद्देनजर पार्टी के परंपरागत मतदाताओं को पार्टी के पक्ष में लामबंद करने तथा पार्टी का खोया हुआ जनाधार सहेजने में कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रियंकास्त्र का उपयोग किया जाना कांग्रेस पार्टी के लिये फायदेमंद साबित हो सकता है। 




उल्लेखनीय है कि यूपी कांग्रेस के नए प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने प्रियंका को अमेठी और रायबरेली से बाहर भी प्रचार करने का प्रस्ताव दिया था जिस पर उन्हें प्रियंका की तरफ से साकारात्मक संकेत दिये गये थे। इसके अलावा यूपी में कांग्रेस पार्टी के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर पहले से ही कहते आए हैं कि यूपी के इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को जंग जीतनी ही होगी। इस दृष्टि से संभवत: पीके की सलाह पर अमल सुनिश्चित करते हुए प्रियंका गांधी को कमान सौंपने से पार्टी के उस राजनीतिक घाटे की भरपाई भी की जा सकेगी जिसके तहत विभिन्न कालखंडों में पार्टी यूपी में नये-नये संगठन प्रभारी नियुक्त करने सहित पार्टी के संगठनात्मक हितों को दृष्टिगत रखते हाएु अन्य तमाम तरह की कवायदें करती रही लेकिन गुटबाजी या अन्य परिस्थितिजन्य कारणों के चलते पार्टी के यह प्रयास सफलतादायक साबित नहीं हो पाए। यूपी चुनावों के मद्देनजर राज्य की सभी प्रमुख पार्टियों द्वारा अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिये जाने के साथ ही उम्मीदवारों के नामों पर मंथन भी प्रारंभ कर दिया गया है। चाहे समाजवादी पार्टी हो या बहुजन समाज पार्टी या अन्य राजनीतिक दल। सबकी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं व एजेंडा है तथा सभी की कोशिश यही होगी कि वह अपनी निर्धारित लक्ष्य हासिल कर सकें। 




राज्य में समाजवादी पार्टी सत्ता में है तो उसका दावा है कि वह अपनी सरकार की उपलब्धियों व अपनी रीतियों-नीतियों की बदौलत सत्ता में अपनी फिर वापसी का मार्ग प्रशस्त करने में सफल हो जाएगी तो बहुजन समाज पार्टी का दावा है कि वह राज्य में मुख्य विपक्षी पार्टी है इसलिये राज्य के मतदाता विकल्प के तौर पर प्रदेश की सत्ता की कमान उसे ही सौंपेंगे। इन सब दावों के बीच कांग्रेस अगर राज्य की राजनीति में कुछ निर्णायक कवायदों को अंजाम देने में सफल होती है तो इससे पार्टी की राजनीतिक संभावनाएं कई गुना बढ़ जाएंगी। 


 

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